रिपोर्टर: मोहम्मद कैफ खान
रामनगर। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं को रिझाने के नए-नए तरीके देखने को मिल रहे हैं। इन दिनों कुछ प्रत्याशी अपने समर्थकों को अमृतपान और भोज के माध्यम से लुभा रहे हैं। इसके जरिए वे जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह केवल एक चुनावी रणनीति है, या फिर इसके पीछे जनता की भलाई की कोई वास्तविक मंशा है?अमृतपान और भोज: वादों की जगह दिखावा? रामनगर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्याशियों द्वारा अमृतपान के आयोजन की खबरें चर्चा में हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और प्रत्याशी अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, स्थानीय निवासी इस पर सवाल उठाने लगे हैं। एक युवा मतदाता अजय वर्मा का कहना है, “चुनाव के समय ऐसे आयोजन देखकर लगता है कि यह केवल वोट पाने का तरीका है। असली काम चुनाव जीतने के बाद नजर आना चाहिए।” जनता को करना होगा जागरूक इन चुनावी चालों के बीच जनता को जागरूक होने की जरूरत है। एक वरिष्ठ नागरिक, सुमित्रा देवी ने कहा, “नेता चुनाव के समय अमृतपान कराते हैं, लेकिन जब समस्याओं का समाधान करने का समय आता है, तो गायब हो जाते हैं। जनता को समझना चाहिए कि उनका वोट विकास के लिए है, न कि ऐसे आयोजनों के लालच में पड़कर।” लोकतंत्र का मूल्य समझें चुनावी विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कार्यक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकते हैं। “चुनाव सेवा का अवसर है, न कि वोटों के लिए लुभाने का खेल। अगर जनता इन दिखावों के आधार पर अपना वोट देती है, तो असली मुद्दे कहीं खो जाएंगे,”एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा। जनता को अब यह तय करना होगा कि वह अमृतपान और भोज के बहकावे में न आए। उनके वोट का इस्तेमाल रामनगर के असली मुद्दों जैसे कि सड़क, पानी, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए होना चाहिए।रामनगर के मतदाताओं को चाहिए कि वे भावनाओं में बहने के बजाय तार्किक रूप से सोचें। चुनाव में दिखावे और दिखावटी वादों को नजरअंदाज कर, उन्हें अपने मत का प्रयोग केवल उन प्रत्याशियों के लिए करना चाहिए जो उनके विकास और समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हों।