रिपोर्टर मोहम्मद कैफ खान
रामनगर । सांवल्दे के ग्राम सांवल्दे और आसपास के इलाकों में टाइगर का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि वन विभाग द्वारा तैनात किए गए वाचर तक भयभीत होकर अपनी ड्यूटी सही से नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बावजूद कॉर्बेट प्रशासन के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। इसी के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति ने 27 मार्च को उपजिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार निदेशक कॉर्बेट रिजर्व कार्यालय गए, लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं मिला। उनका कहना है कि ऐसे में अब प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए यह आंदोलन जरूरी हो गया है। संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि अगर वन विभाग और प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि सांवल्दे के निर्दोष ग्रामीणों पर लगाए गए फर्जी मुकदमों को वापस लेने, जंगली जानवरों से सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा है।इसके साथ ही जंगली जानवरों के हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को 25 लाख और घायलों को 10 लाख का मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है। घायलों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार को उठानी होगी। प्रदर्शन के दौरान कॉर्बेट पार्क निदेशक साकेत बडोला और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर पुलिस क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।बैठक में उपग्राम प्रधान तारा बेलवाल, बालम सिंह थापा, तुलसी जोशी, कौशल्या, बलवीर सिंह, समाजवादी लोकमंच के संयोजक मुनीष कुमार, संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, राजेंद्र सिंह, राशिद, भुवन चंद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर जनता को खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा!